Daily Archives: August 25, 2025

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अनंत विराम

आकाश निरव, तारे उजळ, मनाचे भार होती विरळ। रुपेरी अबंरी न्हाली रात्र, गार झुळुकीत उमलली गात्र। गहन अनंताचा गारवा थर, शांत शुद्ध  कल्याण स्वर। पानांतून वारा हलके गातो, नभलहरी मनाशी गुंफतो। गगनी लपले चंदेरी दान,                                […]